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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 6

अध्याय 7 · श्लोक 6

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय । अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥ ६॥

etad-yonīni bhūtāni sarvāṇīty upadhāraya | ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayas tathā ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एतत्: इन दोनों (अपरा-परा प्रकृति) से; योनीनि: जिनकी उत्पत्ति है; भूतानि: समस्त भूत (प्राणी); सर्वाणि: सभी; इति: इस प्रकार; उपधारय: समझ; अहम्: मैं; कृत्स्नस्य: सम्पूर्ण; जगतः: जगत का; प्रभवः: उत्पत्ति स्थान; प्रलयः: प्रलय स्थान; तथा: भी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

समस्त प्राणी इन दोनों (अपरा और परा प्रकृति) से उत्पन्न होते हैं, ऐसा तू समझ। और मैं सम्पूर्ण जगत का उत्पत्ति स्थान तथा प्रलय स्थान भी हूँ।

English Translation

All beings have these two as their source. Know that I am the origin and dissolution of the whole universe.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जड़ और चेतन दोनों प्रकृतियाँ भगवान से ही उत्पन्न हैं। वे ही सृष्टि के आदि कारण और संहारकर्ता हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।