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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 29

अध्याय 7 · श्लोक 29

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये । ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥ २९॥

jarā-maraṇa-mokṣāya mām āśritya yatanti ye | te brahma tad viduḥ kṛtsnam adhyātmaṃ karma cākhilam ||29||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

जरामरणमोक्षाय: जरा और मरण से मुक्ति के लिए; माम्: मुझे; आश्रित्य: आश्रय लेकर; यतन्ति: प्रयत्न करते हैं; ये: जो; ते: वे; ब्रह्म: ब्रह्म को; तत्: उस; विदुः: जानते हैं; कृत्स्नम्: सम्पूर्ण; अध्यात्मम्: अध्यात्म; च: और; अखिलम्: सम्पूर्ण; कर्म: कर्म को।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो पुरुष जरा और मरण से मुक्ति के लिए मेरी शरण ग्रहण करके प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्म, सम्पूर्ण अध्यात्म और समस्त कर्म को जान लेते हैं।

English Translation

Those who strive for freedom from old age and death, taking refuge in Me, know Brahman, the whole of Adhyatma, and all Karma.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जो भक्त जरा-मरण से छूटने के लिए भगवान की शरण लेते हैं, वे ब्रह्म, अध्यात्म (आत्मतत्त्व) और कर्म के रहस्य को समझ जाते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।