आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 28

अध्याय 7 · श्लोक 28

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् । ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥ २८॥

yeṣāṃ tv anta-gataṃ pāpaṃ janānāṃ puṇya-karmaṇām | te dvandva-moha-nirmuktā bhajante māṃ dṛḍha-vratāḥ ||28||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

येषाम्: जिनके; तु: तो; अन्तगतम्: समाप्त हो गया है; पापम्: पाप; जनानाम्: मनुष्यों के; पुण्यकर्मणाम्: पुण्य कर्म करने वाले; ते: वे; द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता: द्वन्द्व और मोह से मुक्त; भजन्ते: भजते हैं; माम्: मुझे; दृढव्रताः: दृढ़ व्रत वाले।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

परन्तु जिन पुण्यकर्मी मनुष्यों के पाप समाप्त हो गए हैं, वे द्वन्द्व-मोह से मुक्त होकर दृढ़ व्रत से मेरा भजन करते हैं।

English Translation

But those men of virtuous deeds, whose sins have come to an end, are freed from the delusion of dualities and worship Me with firm resolve.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जिनके पाप क्षीण हो गए हैं, वे राग-द्वेष के द्वन्द्व से मुक्त होकर सच्चे मन से भगवान की भक्ति करते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।