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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 30

अध्याय 7 · श्लोक 30

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः । प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः ॥ ३०॥

sādhibhūtādhidaivaṃ māṃ sādhiyajñaṃ ca ye viduḥ | prayāṇa-kāle ’pi ca māṃ te vidur yukta-cetasaḥ ||30||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

साधिभूत: अधिभूत सहित; अधिदैवम्: अधिदैव सहित; माम्: मुझे; साधियज्ञम्: अधियज्ञ सहित; च: और; ये: जो; विदुः: जानते हैं; प्रयाणकाले: मृत्यु काल में; अपि: भी; च: और; माम्: मुझे; ते: वे; विदुः: जानते हैं; युक्तचेतसः: युक्तचित्त वाले।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो मुझे अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के रूप में जानते हैं, वे युक्तचित्त होकर मृत्युकाल में भी मुझे जानते हैं (अर्थात् मुझे प्राप्त होते हैं)।

English Translation

Those who know Me as the Adhibhuta (the basis of material existence), Adhidaiva (the basis of all gods), and Adhiyajna (the basis of all sacrifices), they, with their minds steadfast, know Me even at the time of death.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

इस श्लोक में भगवान कहते हैं कि जो उनके विभिन्न रूपों (अधिभूत, अधिदैव, अधियज्ञ) को समझ लेते हैं, वे अन्त समय में भी उनमें स्थित रहते हैं और उन्हें प्राप्त होते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।