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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 26

अध्याय 7 · श्लोक 26

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन । भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन ॥ २६॥

vedāhaṃ samatītāni vartamānāni cārjuna | bhaviṣyāṇi ca bhūtāni māṃ tu veda na kaścana ||26||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

वेद: जानता हूँ; अहम्: मैं; समतीतानि: बीते हुए; वर्तमानानि: वर्तमान; च: और; अर्जुन: हे अर्जुन; भविष्याणि: भविष्य में होने वाले; च: भी; भूतानि: सब प्राणियों को; माम्: मुझे; तु: तो; वेद: जानता है; न: नहीं; कश्चन: कोई भी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों को, जो बीत चुके हैं, वर्तमान में हैं और भविष्य में होंगे, जानता हूँ। परन्तु मुझे कोई नहीं जानता।

English Translation

I know, O Arjuna, all beings that are past, present, and future; but no one knows Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान सर्वज्ञ हैं – वे भूत, वर्तमान और भविष्य सब जानते हैं, किन्तु उनके दिव्य स्वरूप को कोई नहीं जान पाता।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।