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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 24

अध्याय 7 · श्लोक 24

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः । परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम् ॥ २४॥

avyaktaṃ vyaktim āpannaṃ manyante mām abuddhayaḥ | paraṃ bhāvam ajānanto mamāvyayam anuttamam ||24||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अव्यक्तम्: अव्यक्त; व्यक्तिम्: व्यक्त रूप को; आपन्नम्: प्राप्त हुआ; मन्यन्ते: मानते हैं; माम्: मुझे; अबुद्धयः: अबुद्धि लोग; परम्: परम; भावम्: भाव को; अजानन्तः: न जानते हुए; मम: मेरे; अव्ययम्: अविनाशी; अनुत्तमम्: उत्तम।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अबुद्धि लोग मुझ अव्यक्त को व्यक्त रूप में प्राप्त मानते हैं, वे मेरे परम, अविनाशी और अनुत्तम भाव को नहीं जानते।

English Translation

The unintelligent think of Me, the Unmanifest, as having become manifest, not knowing My supreme, imperishable and transcendental state.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अज्ञानी लोग भगवान को एक साधारण मनुष्य के रूप में देखते हैं, जबकि वे निर्गुण, अव्यक्त और परम हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।