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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 23

अध्याय 7 · श्लोक 23

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥ २३॥

antavat tu phalaṃ teṣāṃ tad bhavaty alpa-medhasām | devān deva-yajo yānti mad-bhaktā yānti mām api ||23||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अन्तवत्: नाशवान्; तु: तो; फलम्: फल; तेषाम्: उनका; तत्: वह; भवति: होता है; अल्पमेधसाम्: अल्पबुद्धि वालों का; देवान्: देवताओं को; देवयजः: देवताओं के पूजक; यान्ति: प्राप्त होते हैं; मद्भक्ताः: मेरे भक्त; यान्ति: प्राप्त होते हैं; माम्: मुझको; अपि: भी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उन अल्पबुद्धि वालों का वह फल नाशवान् होता है। देवताओं के पूजक देवताओं को प्राप्त होते हैं, परन्तु मेरे भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं।

English Translation

But the fruit (accruing) to these men of little understanding is limited. The worshippers of the gods go to the gods, but My devotees come to Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

देवताओं की उपासना से मिलने वाला फल सीमित और नाशवान् है, जबकि भगवान की भक्ति से प्राप्त फल अनन्त और अविनाशी है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।