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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 22

अध्याय 7 · श्लोक 22

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ २२॥

sa tayā śraddhayā yuktas tasyārādhanam īhate | labhate ca tataḥ kāmān mayaiva vihitān hi tān ||22||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

स: वह; तया: उस श्रद्धा से; युक्तः: युक्त होकर; तस्य: उस (देवता) की; आराधनम्: आराधना; ईहते: करता है; लभते: प्राप्त करता है; च: और; ततः: उससे; कामान्: अभीष्ट वस्तुओं को; मया: मेरे द्वारा; एव: ही; विहितान्: नियत; हि: निश्चय ही; तान्: उनको।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

वह उस श्रद्धा से युक्त होकर उस (देवता) की आराधना करता है और उससे अपने अभीष्ट पदार्थों को प्राप्त करता है – वे सब मेरे द्वारा ही नियत किए गए होते हैं।

English Translation

Endowed with that faith, he engages in the worship of that (form) and from it obtains his desires, these being decreed by Me alone.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भक्त अपनी श्रद्धा से देवता की उपासना करता है और वांछित फल पाता है, किन्तु वास्तव में वह फल भगवान ही देते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।