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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 21

अध्याय 7 · श्लोक 21

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति । तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम् ॥ २१॥

yo yo yāṃ yāṃ tanuṃ bhaktaḥ śraddhayārcitum icchati | tasya tasyācalāṃ śraddhāṃ tām eva vidadhāmy aham ||21||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यः यः: जो-जो; याम् याम्: जिस-जिस; तनुम्: देवता के रूप को; भक्तः: भक्त; श्रद्धया: श्रद्धा से; अर्चितुम्: पूजा करने को; इच्छति: इच्छा करता है; तस्य तस्य: उस-उसकी; अचलाम्: अचल; श्रद्धाम्: श्रद्धा को; ताम्: उसी (देवता) में; एव: ही; विदधामि: स्थिर करता हूँ; अहम्: मैं।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो-जो भक्त जिस-जिस देवता के रूप को श्रद्धापूर्वक पूजना चाहता है, उस-उसकी श्रद्धा को मैं उसी देवता में अचल कर देता हूँ।

English Translation

Whatever form any devotee desires to worship with faith – that (same) faith of his I make unshakable.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान सभी की श्रद्धा का सम्मान करते हैं और उसे स्थिर रखते हैं, चाहे वह किसी भी देवता की उपासना क्यों न करता हो।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।