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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 19

अध्याय 7 · श्लोक 19

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते । वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः ॥ १९॥

bahūnāṃ janmanām ante jñānavān māṃ prapadyate | vāsudevaḥ sarvam iti sa mahātmā su-durlabhaḥ ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

बहूनाम्: अनेक; जन्मनाम्: जन्मों के; अन्ते: अन्त में; ज्ञानवान्: ज्ञानवान् पुरुष; माम्: मुझे; प्रपद्यते: शरण लेता है; वासुदेवः: वासुदेव; सर्वम्: सब कुछ; इति: इस प्रकार; सः: वह; महात्मा: महात्मा; सुदुर्लभः: अत्यन्त दुर्लभ।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अनेक जन्मों के अन्त में ज्ञानवान् पुरुष मुझे इस प्रकार जानकर कि "वासुदेव सब कुछ है" मेरी शरण ग्रहण करता है। ऐसा महात्मा अत्यन्त दुर्लभ होता है।

English Translation

At the end of many births, the man of wisdom takes refuge in Me, realizing that Vasudeva (Krishna) is all. Such a great soul is very rare.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सच्चा ज्ञान अनेक जन्मों के साधना के बाद मिलता है, जब जीव समझ जाता है कि ईश्वर ही सब कुछ है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।