आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 16

अध्याय 7 · श्लोक 16

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन । आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ ॥ १६॥

catur-vidhā bhajante māṃ janāḥ sukṛtino ’rjuna | ārto jijñāsur arthārthī jñānī ca bharatarṣabha ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

चतुर्विधा: चार प्रकार के; भजन्ते: भजते हैं; माम्: मुझे; जनाः: मनुष्य; सुकृतिनः: पुण्यात्मा; अर्जुन: हे अर्जुन; आर्त: दुःखी; जिज्ञासु: जिज्ञासु; अर्थार्थी: अर्थ (ऐश्वर्य) चाहने वाला; ज्ञानी: ज्ञानी; च: और; भरतर्षभ: हे भरतश्रेष्ठ।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! चार प्रकार के पुण्यात्मा मनुष्य मेरा भजन करते हैं: आर्त (दुःखी), जिज्ञासु (ज्ञान की इच्छा रखने वाला), अर्थार्थी (सांसारिक वस्तुओं का इच्छुक) और ज्ञानी।

English Translation

Four kinds of virtuous men worship Me, O Arjuna: the distressed, the seeker of knowledge, the seeker of wealth, and the wise, O best of the Bharatas.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब कृष्ण चार प्रकार के भक्तों का वर्णन करते हैं, जो पुण्यशाली होते हैं और भगवान की ओर आकर्षित होते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।