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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 15

अध्याय 7 · श्लोक 15

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः । माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥ १५॥

na māṃ duṣkṛtino mūḍhāḥ prapadyante narādhamāḥ | māyayāpahṛta-jñānā āsuraṃ bhāvam āśritāḥ ||15||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: नहीं; माम्: मुझे; दुष्कृतिनः: पापी; मूढाः: मूढ़; प्रपद्यन्ते: भजते; नराधमाः: नराधम; मायया: माया से; अपहृतज्ञाना: जिनका ज्ञान हर लिया गया है; आसुरम्: आसुरी; भावम्: भाव को; आश्रिताः: आश्रित हुए।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

दुष्कर्मी, मूढ़, नराधम तथा जिनका ज्ञान माया से हर लिया गया है और जो आसुरी भाव को आश्रित हैं, वे मुझे नहीं भजते।

English Translation

The evil-doers, the deluded, the lowest of men, do not seek Me; they whose knowledge is carried away by Maya, and who have resorted to demoniacal nature.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

चार प्रकार के लोग भगवान की शरण नहीं लेते: पापी, मूर्ख, नीच और आसुरी प्रवृत्ति के लोग।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।