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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 · श्लोक 12

अध्याय 7 · श्लोक 12

ज्ञान विज्ञान योग (Gyan Vigyan Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये । मत्त एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि ॥ १२॥

ye caiva sāttvikā bhāvā rājasās tāmasāś ca ye | matta eveti tān viddhi na tv ahaṃ teṣu te mayi ||12||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ये: जो; च: और; एव: ही; सात्त्विका: सात्त्विक; भावाः: भाव; राजसा: राजस; तामसा: तामस; च: और; ये: जो; मत्तः: मुझसे; एव: ही; इति: इस प्रकार; तान्: उनको; विद्धि: जान; न: नहीं; तु: तो; अहम्: मैं; तेषु: उनमें; ते: वे; मयि: मुझमें।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो भी सात्त्विक, राजस और तामस भाव हैं – वे सब मुझसे ही उत्पन्न होते हैं, ऐसा तू जान। परन्तु मैं उनमें नहीं हूँ, वे मुझमें हैं।

English Translation

Whatever beings there are that are Sattvic, Rajasic or Tamasic – know that they all proceed from Me alone. But I am not in them; they are in Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सभी गुण (सत्त्व, रज, तम) भगवान से ही उत्पन्न हैं, किन्तु वे उनके अधीन हैं, न कि वे गुणों के अधीन।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।