आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 9

अध्याय 18 · श्लोक 9

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन। सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः॥९॥

kāryam ity eva yat karma niyataṃ kriyate 'rjuna | saṅgaṃ tyaktvā phalaṃ caiva sa tyāgaḥ sāttviko mataḥ ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कार्यम्: ought to be done; इति: thus; एव: indeed; यत्: which; कर्म: action; नियतम्: prescribed; क्रियते: is performed; अर्जुन: O Arjuna; सङ्गम्: attachment; त्यक्त्वा: having abandoned; फलम्: fruit; च: and; एव: also; सः: that; त्यागः: renunciation; सात्त्विकः: in the mode of goodness; मतः: is considered.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! जो नियत कर्म केवल कर्तव्य समझकर, आसक्ति और फल का त्याग करके किया जाता है, वह त्याग सात्त्विक माना गया है।

English Translation

O Arjuna, when prescribed duty is performed merely because it ought to be done, abandoning attachment and also the fruit, that renunciation is considered to be in the mode of goodness.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ सात्त्विक त्याग का लक्षण बताया गया है। कर्तव्य भावना से, बिना आसक्ति और फल की इच्छा के कर्म करना ही सात्त्विक त्याग है। यही गीता का आदर्श है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।