आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३३ PM | सूर्यास्त: ०५:२७ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 76

अध्याय 18 · श्लोक 76

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्। केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः॥७६॥

rājan saṃsmṛtya saṃsmṛtya saṃvādam imam adbhutam | keśavārjunayoḥ puṇyaṃ hṛṣyāmi ca muhur muhuḥ ||76||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

राजन्: O King; संस्मृत्य संस्मृत्य: remembering again and again; संवादम्: dialogue; इमम्: this; अद्भुतम्: wonderful; केशव-अर्जुनयोः: of Keshava and Arjuna; पुण्यम्: holy; हृष्यामि: I rejoice; च: and; मुहुः मुहुः: repeatedly.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे राजन्! केशव और अर्जुन के इस अद्भुत एवं पुण्यमय संवाद को बार-बार स्मरण करके मैं बारम्बार हर्षित होता हूँ।

English Translation

O King, repeatedly remembering this wonderful and holy dialogue between Keshava and Arjuna, I rejoice again and again.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सञ्जय धृतराष्ट्र से कहते हैं कि जब-जब वे इस संवाद को याद करते हैं, उन्हें अपार हर्ष होता है। यह गीता के नित्य स्मरण का महत्व बताता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।