आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३३ PM | सूर्यास्त: ०५:२७ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 75

अध्याय 18 · श्लोक 75

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्। योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्॥७५॥

vyāsa-prasādāc chrutavān etad guhyam aham param | yogaṃ yogeśvarāt kṛṣṇāt sākṣāt kathayataḥ svayam ||75||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

व्यास-प्रसादात्: by the grace of Vyasa; श्रुतवान्: have heard; एतत्: this; गुह्यम्: secret; अहम्: I; परम्: supreme; योगम्: yoga; योग-ईश्वरात्: from the Lord of Yoga; कृष्णात्: from Krishna; साक्षात्: directly; कथयतः: speaking; स्वयम्: Himself.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

व्यास की कृपा से मैंने इस परम गोपनीय योग को साक्षात् योगेश्वर श्रीकृष्ण से, जो स्वयं कह रहे थे, सुना।

English Translation

By the grace of Vyasa, I have heard this supreme secret yoga directly from Krishna, the Lord of Yoga, Himself speaking.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सञ्जय बताते हैं कि उन्हें व्यासजी की कृपा से यह अलौकिक शक्ति मिली कि वे दूर बैठे ही कृष्ण-अर्जुन के संवाद को सुन सके। यह गुरु-कृपा का महत्व है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।