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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 74

अध्याय 18 · श्लोक 74

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सञ्जय उवाच इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः। संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्॥७४॥

sañjaya uvāca ity ahaṃ vāsudevasya pārthasya ca mahātmanaḥ | saṃvādam imam aśrauṣam adbhutaṃ romaharṣaṇam ||74||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सञ्जय: Sanjaya; उवाच: said; इति: thus; अहम्: I; वासुदेवस्य: of Vasudeva (Krishna); पार्थस्य: of Partha (Arjuna); च: and; महा-आत्मनः: of the great soul; संवादम्: dialogue; इमम्: this; अश्रौषम्: heard; अद्भुतम्: wonderful; रोमहर्षणम्: thrilling.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सञ्जय बोले: इस प्रकार मैंने वासुदेव और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत और रोमांचक संवाद को सुना।

English Translation

Sanjaya said: Thus I have heard this wonderful dialogue between Vasudeva and the great-souled Partha, which causes the hair to stand on end.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब सञ्जय धृतराष्ट्र से कहते हैं कि उन्होंने यह अद्भुत संवाद सुना, जो अत्यन्त रोमांचकारी है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।