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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 73

अध्याय 18 · श्लोक 73

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत। स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव॥७३॥

arjuna uvāca naṣṭo mohaḥ smṛtir labdhā tvat-prasādān mayācyuta | sthito 'smi gata-sandehaḥ kariṣye vacanaṃ tava ||73||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन: Arjuna; उवाच: said; नष्टः: destroyed; मोहः: delusion; स्मृतिः: memory; लब्धा: regained; त्वत्-प्रसादात्: by Your grace; मया: by me; अच्युत: O infallible one; स्थितः: standing; अस्मि: I am; गत-सन्देहः: freed from doubt; करिष्ये: I will act; वचनम्: word; तव: Your.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: हे अच्युत! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया और स्मृति (ज्ञान) प्राप्त हो गई। मैं संशयरहित होकर स्थित हूँ; आपके वचन का पालन करूँगा।

English Translation

Arjuna said: O infallible one, my delusion is destroyed and I have regained memory by Your grace. I am standing freed from doubt; I will act according to Your word.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब भगवान् के उपदेश का फल घोषित करते हैं। उनका मोह दूर हो गया, उन्हें स्मृति (अपने स्वरूप का ज्ञान) मिल गया, वे संशयरहित हो गए हैं और भगवान् की आज्ञा का पालन करेंगे।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।