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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 72

अध्याय 18 · श्लोक 72

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा। कच्चिदज्ञानसम्मोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय॥७२॥

kaccid etac chrutaṃ pārtha tvayaikāgreṇa cetasā | kaccid ajñāna-sammohaḥ pranaṣṭas te dhanañjaya ||72||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कच्चित्: whether; एतत्: this; श्रुतम्: heard; पार्थ: O Partha; त्वया: by you; एकाग्रेण: with single-pointed; चेतसा: mind; कच्चित्: whether; अज्ञान-सम्मोहः: the delusion of ignorance; प्रनष्टः: destroyed; ते: your; धनञ्जय: O Dhananjaya.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! क्या यह (गीता) तूने एकाग्र चित्त से सुना? हे धनञ्जय! क्या तेरा अज्ञानजनित मोह नष्ट हो गया?

English Translation

O Partha, have you heard this with a one-pointed mind? O Dhananjaya, has your delusion born of ignorance been destroyed?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अब अर्जुन से पूछते हैं कि क्या उसने गीता को एकाग्रचित्त होकर सुना और क्या उसका मोह दूर हो गया। यह शिक्षक द्वारा शिष्य की समझ की जाँच है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।