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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 70

अध्याय 18 · श्लोक 70

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः। ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः॥७०॥

adhyeṣyate ca ya imaṃ dharmyaṃ saṃvādam āvayoḥ | jñāna-yajñena tenāham iṣṭaḥ syām iti me matiḥ ||70||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अध्येष्यते: will study; च: and; यः: who; इमम्: this; धर्म्यम्: sacred; संवादम्: dialogue; आवयोः: of ours; ज्ञान-यज्ञेन: by the sacrifice of knowledge; तेन: by him; अहम्: I; इष्टः: worshipped; स्याम्: am; इति: thus; मे: My; मतिः: opinion.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

तथा जो हम दोनों के इस धर्मयुक्त संवाद का अध्ययन करेगा, उसके द्वारा मैं ज्ञानयज्ञ से पूजित होऊँगा – ऐसा मेरा मत है।

English Translation

And he who will study this sacred dialogue of ours, by him I would be worshipped through the sacrifice of knowledge. Such is My conviction.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जो भी इस गीता-संवाद का अध्ययन करता है, वह ज्ञानयज्ञ द्वारा भगवान् की पूजा करता है। यह अध्ययन स्वयं एक यज्ञ है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।