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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 69

अध्याय 18 · श्लोक 69

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः। भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि॥६९॥

na ca tasmān manuṣyeṣu kaścin me priya-kṛttamaḥ | bhavitā na ca me tasmād anyaḥ priyataro bhuvi ||69||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

न: not; च: and; तस्मात्: than him; मनुष्येषु: among men; कश्चित्: anyone; मे: to Me; प्रिय-कृत्-तमः: more dear; भविता: will be; न: not; च: and; मे: to Me; तस्मात्: than him; अन्यः: other; प्रियतरः: dearer; भुवि: on earth.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उससे बढ़कर मनुष्यों में मेरा प्रिय कार्य करने वाला दूसरा नहीं है और न ही पृथ्वी पर उससे अधिक मुझे प्रिय दूसरा कोई होगा।

English Translation

There is no one among men who does more dear service to Me than he; nor shall anyone be dearer to Me on earth than he.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

गीता का प्रचार करने वाला भगवान् का सबसे प्रिय भक्त है। भगवान् स्पष्ट करते हैं कि उन्हें ऐसा व्यक्ति अत्यन्त प्रिय है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।