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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 68

अध्याय 18 · श्लोक 68

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

य इदं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति। भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः॥६८॥

ya idaṃ paramaṃ guhyaṃ mad-bhakteṣv abhidhāsyati | bhaktim mayi parāṃ kṛtvā mām evaiṣyaty asaṃśayaḥ ||68||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यः: who; इदम्: this; परमम्: most; गुह्यम्: confidential; मत्-भक्तेषु: among My devotees; अभिधास्यति: will teach; भक्तिम्: devotion; मयि: to Me; पराम्: supreme; कृत्वा: having done; माम्: to Me; एव: alone; एष्यति: will come; असंशयः: without doubt.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो इस परम गोपनीय ज्ञान को मेरे भक्तों में कहेगा, तथा मुझमें परम भक्ति करेगा, वह निःसन्देह मुझको ही प्राप्त होगा।

English Translation

He who will teach this supreme secret to My devotees, showing supreme devotion to Me, will come to Me alone, without doubt.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

जो व्यक्ति इस गीता ज्ञान को भक्तों के बीच प्रचारित करता है, वह स्वयं परम भक्ति करने वाला होता है और निश्चित ही भगवान् को प्राप्त होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।