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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 67

अध्याय 18 · श्लोक 67

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन। न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति॥६७॥

idaṃ te nātapaskāya nābhaktāya kadācana | na cāśuśrūṣave vācyaṃ na ca māṃ yo 'bhyasūyati ||67||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

इदम्: this; ते: by you; न: not; अतपस्काय: to one who is not austere; न: not; अभक्ताय: to one who is not a devotee; कदाचन: ever; न: not; च: and; अशुश्रूषवे: to one who does not serve; वाच्यम्: to be spoken; न: not; च: and; माम्: Me; यः: who; अभ्यसूयति: cavils at.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यह (ज्ञान) तपस्वी को छोड़कर, अभक्त को, अशुश्रूषु (सेवा न करने वाले) को और मुझसे द्वेष करने वाले को कभी नहीं कहना चाहिए।

English Translation

This should never be spoken by you to one who is not austere, or to one who is not a devotee, or to one who does not serve, or to one who cavils at Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अर्जुन को निर्देश देते हैं कि इस गोपनीय ज्ञान को अयोग्य व्यक्तियों को न बताए। यह तपस्वी, भक्त, सेवापरायण और ईश्वर में श्रद्धा रखने वाले को ही देना चाहिए।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।