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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 66

अध्याय 18 · श्लोक 66

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥६६॥

sarva-dharmān parityajya mām ekaṃ śaraṇaṃ vraja | ahaṃ tvā sarva-pāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śucaḥ ||66||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सर्व-धर्मान्: all duties; परित्यज्य: abandoning; माम्: Me; एकम्: alone; शरणम्: refuge; व्रज: take; अहम्: I; त्वा: you; सर्व-पापेभ्यः: from all sins; मोक्षयिष्यामि: will liberate; मा: do not; शुचः: grieve.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सब धर्मों (कर्तव्यों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ। मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूँगा; शोक मत कर।

English Translation

Abandon all duties and take refuge in Me alone. I will liberate you from all sins; do not grieve.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह गीता का सबसे प्रसिद्ध और सारगर्भित श्लोक है। भगवान् कहते हैं कि समस्त धर्मों का परित्याग करके केवल उनकी शरण में जाने से वे सब पापों से मुक्त कर देंगे। यह पूर्ण शरणागति का सिद्धान्त है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।