मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – श्लोक 66
श्लोक ६६ में भगवान् का अन्तिम उपदेश: सब कुछ छोड़कर उनकी शरण में जाओ, वे मुक्ति देंगे। Verse 66: Abandon all duties and take refuge in Me alone; I will liberate you from all sins; do not grieve.
संस्कृत श्लोक
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥६६॥
sarva-dharmān parityajya mām ekaṃ śaraṇaṃ vraja | ahaṃ tvā sarva-pāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śucaḥ ||66||
पदच्छेद / शब्दार्थ
सर्व-धर्मान्: all duties; परित्यज्य: abandoning; माम्: Me; एकम्: alone; शरणम्: refuge; व्रज: take; अहम्: I; त्वा: you; सर्व-पापेभ्यः: from all sins; मोक्षयिष्यामि: will liberate; मा: do not; शुचः: grieve.
हिंदी अनुवाद
सब धर्मों (कर्तव्यों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ। मैं तुझे सब पापों से मुक्त कर दूँगा; शोक मत कर।
English Translation
Abandon all duties and take refuge in Me alone. I will liberate you from all sins; do not grieve.
टीका / Commentary
यह गीता का सबसे प्रसिद्ध और सारगर्भित श्लोक है। भगवान् कहते हैं कि समस्त धर्मों का परित्याग करके केवल उनकी शरण में जाने से वे सब पापों से मुक्त कर देंगे। यह पूर्ण शरणागति का सिद्धान्त है।