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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 7

अध्याय 18 · श्लोक 7

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते। मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः॥७॥

niyatasya tu sannyāsaḥ karmaṇo nopapadyate | mohāt tasya parityāgas tāmasaḥ parikīrtitaḥ ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

नियतस्य: of prescribed duties; तु: indeed; संन्यासः: renunciation; कर्मणः: of action; न: not; उपपद्यते: is proper; मोहात्: due to delusion; तस्य: of that; परित्यागः: abandonment; तामसः: in the mode of ignorance; परिकीर्तितः: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

नियत कर्मों का संन्यास उचित नहीं है। मोह से उनका त्याग करना तामस त्याग कहा गया है।

English Translation

Renunciation of prescribed duties is not proper. Abandoning them due to delusion is declared to be in the mode of ignorance.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

नित्य नैमित्तिक कर्म (जैसे सन्ध्या, यज्ञ) जो शास्त्र द्वारा विहित हैं, उनका त्याग करना उचित नहीं। यदि अज्ञान या मोहवश त्याग किया जाए तो वह तामस त्याग है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।