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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 64

अध्याय 18 · श्लोक 64

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः। इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्॥६४॥

sarva-guhyatamaṃ bhūyaḥ śṛṇu me paramaṃ vacaḥ | iṣṭo 'si me dṛḍham iti tato vakṣyāmi te hitam ||64||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सर्व-गुह्यतमम्: the most confidential of all; भूयः: again; शृणु: hear; मे: My; परमम्: supreme; वचः: word; इष्टः: dear; असि: you are; मे: to Me; दृढम्: very; इति: thus; ततः: therefore; वक्ष्यामि: I shall speak; ते: for your; हितम्: benefit.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सबसे अति गोपनीय मेरे इस परम वचन को फिर से सुन। तू मुझे अत्यन्त प्रिय है, इसलिए मैं तेरे हित के लिए कहूँगा।

English Translation

Hear again My supreme word, the most confidential of all. You are very dear to Me, therefore I shall speak this for your benefit.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अब सबसे गोपनीय उपदेश देने जा रहे हैं, क्योंकि अर्जुन उनके अत्यन्त प्रिय हैं। यह भक्ति का शिखर है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।