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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 63

अध्याय 18 · श्लोक 63

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया। विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥६३॥

iti te jñānam ākhyātaṃ guhyād guhyataraṃ mayā | vimṛśyaitad aśeṣeṇa yathecchasi tathā kuru ||63||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

इति: thus; ते: to you; ज्ञानम्: knowledge; आख्यातम्: has been taught; गुह्यात्: than secret; गुह्यतरम्: more secret; मया: by Me; विमृश्य: reflecting; एतत्: on this; अशेषेण: fully; यथा: as; इच्छसि: you wish; तथा: so; कुरु: do.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार मैंने तुझसे इस ज्ञान को कहा जो रहस्यों में भी अति रहस्य है। इसका सम्पूर्ण विचार करके, जैसा तू चाहे वैसा कर।

English Translation

Thus I have taught you this knowledge, more secret than all secrets. Reflect on it fully, and then do as you wish.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अब अपना उपदेश समाप्त करते हैं। उन्होंने अर्जुन को गुह्यतम ज्ञान दिया है। अब वे उसे पूर्ण विचार करने के बाद जैसा वह चाहे, वैसा करने की स्वतन्त्रता देते हैं। यह मानव की स्वतन्त्र इच्छा को दर्शाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।