आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३२ PM | सूर्यास्त: ०५:२८ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 62

अध्याय 18 · श्लोक 62

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत। तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्॥६२॥

tam eva śaraṇaṃ gaccha sarva-bhāvena bhārata | tat-prasādāt parāṃ śāntiṃ sthānaṃ prāpsyasi śāśvatam ||62||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तम्: Him; एव: alone; शरणम्: refuge; गच्छ: go; सर्व-भावेन: with all your being; भारत: O Bharata; तत्-प्रसादात्: by His grace; पराम्: supreme; शान्तिम्: peace; स्थानम्: abode; प्राप्स्यसि: you will attain; शाश्वतम्: eternal.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत! तू सब प्रकार से उस एक परमेश्वर की ही शरण में जा। उसकी कृपा से तू परम शान्ति और शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा।

English Translation

O Bharata, go to Him alone for refuge with all your being. By His grace you will attain supreme peace and the eternal abode.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अर्जुन को आदेश देते हैं कि वह उन्हीं की शरण में जाए (अर्थात् कृष्ण की या परमात्मा की)। उनकी कृपा से ही वह परम शान्ति और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।