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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 61

अध्याय 18 · श्लोक 61

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति। भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया॥६१॥

īśvaraḥ sarva-bhūtānāṃ hṛd-deše 'rjuna tiṣṭhati | bhrāmayan sarva-bhūtāni yantrārūḍhāni māyayā ||61||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ईश्वरः: the Lord; सर्व-भूतानाम्: of all beings; हृत्-देशे: in the heart; अर्जुन: O Arjuna; तिष्ठति: dwells; भ्रामयन: causing to revolve; सर्व-भूतानि: all beings; यन्त्र-आरूढानि: mounted on a machine; मायया: by His Maya.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणियों के हृदय में ईश्वर स्थित है, जो माया द्वारा सब प्राणियों को यन्त्र पर बैठे हुए की भाँति घुमा रहा है।

English Translation

The Lord dwells in the heart of all beings, O Arjuna, causing them to revolve by His Maya as if mounted on a machine.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् सर्वव्यापी हैं और सबके हृदय में विराजमान हैं। वे अपनी मायाशक्ति से सब जीवों को उनके कर्मानुसार यन्त्रवत् घुमाते हैं। यह जीव की परतन्त्रता को दर्शाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।