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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 60

अध्याय 18 · श्लोक 60

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा। कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्॥६०॥

svabhāva-jena kaunteya nibaddhaḥ svena karmaṇā | kartuṃ necchasi yan mohāt kariṣyasy avaśo 'pi tat ||60||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

स्वभाव-जेन: born of your own nature; कौन्तेय: O son of Kunti; निबद्धः: bound; स्वेन: by your own; कर्मणा: action; कर्तुम्: to do; न: not; इच्छसि: you wish; यत्: which; मोहात्: from delusion; करिष्यसि: you will do; अवशः: unwillingly; अपि: even; तत्: that.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे कौन्तेय! अपने स्वभाव से उत्पन्न कर्म से बँधा हुआ तू मोहवश जिस कर्म को नहीं करना चाहता, उसे भी तू विवश होकर करेगा।

English Translation

O son of Kunti, bound by your own action born of your nature, that which you do not wish to do from delusion, you will do even unwillingly.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अपने क्षत्रिय स्वभाव से उत्पन्न कर्म (युद्ध) से बँधा हुआ है। चाहे वह अभी मोहवश युद्ध न करना चाहे, परन्तु परिस्थितियाँ उसे विवश कर देंगी। इसलिए बेहतर है कि वह समझदारी से युद्ध करे।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।