मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – श्लोक 59
श्लोक ५९ में बताया गया है कि अहंकार से युद्ध न करने का निर्णय मिथ्या है, क्योंकि स्वभाव उसे युद्ध के लिए बाध्य करेगा। Verse 59: If, from ego, you think you will not fight, your determination is false; your nature will compel you.
संस्कृत श्लोक
यदहंकारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे। मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति॥५९॥
yad ahaṅkāram āśritya na yotsya iti manyase | mithyaiṣa vyavasāyas te prakṛtis tvāṃ niyokṣyati ||59||
पदच्छेद / शब्दार्थ
यत्: if; अहंकारम्: ego; आश्रित्य: resorting to; न: not; योत्स्ये: I will fight; इति: thus; मन्यसे: you think; मिथ्या: false; एष: this; व्यवसायः: determination; ते: your; प्रकृतिः: your nature; त्वाम्: you; नियोक्ष्यति: will engage.
हिंदी अनुवाद
यदि तू अहंकार का आश्रय लेकर यह मानता है कि "मैं युद्ध नहीं करूँगा", तो यह तेरा निश्चय मिथ्या है; तेरा स्वभाव ही तुझे (युद्ध में) प्रवृत्त करेगा।
English Translation
If, resorting to ego, you think, "I will not fight," this determination of yours is false; your nature will compel you.
टीका / Commentary
भगवान् अर्जुन को समझाते हैं कि यदि वह अहंकार से युद्ध न करने की ठानता है, तो उसका स्वभाव (क्षत्रिय धर्म) उसे युद्ध के लिए बाध्य कर देगा। उसकी यह न चाहना मिथ्या है।