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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 59

अध्याय 18 · श्लोक 59

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यदहंकारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे। मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति॥५९॥

yad ahaṅkāram āśritya na yotsya iti manyase | mithyaiṣa vyavasāyas te prakṛtis tvāṃ niyokṣyati ||59||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यत्: if; अहंकारम्: ego; आश्रित्य: resorting to; न: not; योत्स्ये: I will fight; इति: thus; मन्यसे: you think; मिथ्या: false; एष: this; व्यवसायः: determination; ते: your; प्रकृतिः: your nature; त्वाम्: you; नियोक्ष्यति: will engage.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यदि तू अहंकार का आश्रय लेकर यह मानता है कि "मैं युद्ध नहीं करूँगा", तो यह तेरा निश्चय मिथ्या है; तेरा स्वभाव ही तुझे (युद्ध में) प्रवृत्त करेगा।

English Translation

If, resorting to ego, you think, "I will not fight," this determination of yours is false; your nature will compel you.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अर्जुन को समझाते हैं कि यदि वह अहंकार से युद्ध न करने की ठानता है, तो उसका स्वभाव (क्षत्रिय धर्म) उसे युद्ध के लिए बाध्य कर देगा। उसकी यह न चाहना मिथ्या है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।