आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३२ PM | सूर्यास्त: ०५:२८ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 56

अध्याय 18 · श्लोक 56

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः। मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्॥५६॥

sarva-karmāṇy api sadā kurvāṇo mad-vyapāśrayaḥ | mat-prasādād avāpnoti śāśvataṃ padam avyayam ||56||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सर्व-कर्माणि: all actions; अपि: even; सदा: always; कुर्वाणः: performing; मत्-व्यपाश्रयः: taking refuge in Me; मत्-प्रसादात्: by My grace; अवाप्नोति: attains; शाश्वतम्: eternal; पदम्: abode; अव्ययम्: imperishable.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सब कर्मों को सदा करता हुआ भी, मेरे शरण हुआ मनुष्य मेरी कृपा से शाश्वत अविनाशी पद को प्राप्त हो जाता है।

English Translation

Even performing all actions always, taking refuge in Me, by My grace he attains the eternal, imperishable abode.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भक्त कर्म करता रहता है, पर वह भगवान् के शरण होता है। भगवान् की कृपा से वह मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। यह कर्मयोग और भक्तियोग का समन्वय है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।