मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) – श्लोक 55

श्लोक ५५ में बताया गया है कि भक्ति से भगवान् का तत्त्वज्ञान होता है और फिर उनमें प्रवेश। Verse 55: By devotion one knows Me truly, and then enters into Me.

संस्कृत श्लोक

भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः। ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्॥५५॥

bhaktyā mām abhijānāti yāvān yaś cāsmi tattvataḥ | tato māṃ tattvato jñātvā viśate tad-anantaram ||55||

पदच्छेद / शब्दार्थ

भक्त्या: by devotion; माम्: Me; अभिजानाति: knows; यावान्: as I am; यः: who; च: and; अस्मि: I am; तत्त्वतः: in truth; ततः: then; माम्: Me; तत्त्वतः: in truth; ज्ञात्वा: knowing; विशते: enters; तत्-अनन्तरम्: thereafter.

हिंदी अनुवाद

भक्ति के द्वारा वह मुझे तत्त्व से जान लेता है कि मैं कितना हूँ और कौन हूँ। तत्पश्चात् मुझे तत्त्व से जानकर वह तुरन्त मुझमें ही प्रवेश कर जाता है।

English Translation

By devotion he knows Me in truth – what and who I am. Then, having known Me in truth, he enters into Me immediately.

टीका / Commentary

परा भक्ति से साधक भगवान् के स्वरूप को यथार्थ रूप से जान लेता है। फिर उस ज्ञान के बाद वह भगवान् में प्रवेश (तादात्म्य) प्राप्त कर लेता है। यह मोक्ष की सर्वोच्च अवस्था है।