आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३२ PM | सूर्यास्त: ०५:२८ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 55

अध्याय 18 · श्लोक 55

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः। ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्॥५५॥

bhaktyā mām abhijānāti yāvān yaś cāsmi tattvataḥ | tato māṃ tattvato jñātvā viśate tad-anantaram ||55||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

भक्त्या: by devotion; माम्: Me; अभिजानाति: knows; यावान्: as I am; यः: who; च: and; अस्मि: I am; तत्त्वतः: in truth; ततः: then; माम्: Me; तत्त्वतः: in truth; ज्ञात्वा: knowing; विशते: enters; तत्-अनन्तरम्: thereafter.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

भक्ति के द्वारा वह मुझे तत्त्व से जान लेता है कि मैं कितना हूँ और कौन हूँ। तत्पश्चात् मुझे तत्त्व से जानकर वह तुरन्त मुझमें ही प्रवेश कर जाता है।

English Translation

By devotion he knows Me in truth – what and who I am. Then, having known Me in truth, he enters into Me immediately.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

परा भक्ति से साधक भगवान् के स्वरूप को यथार्थ रूप से जान लेता है। फिर उस ज्ञान के बाद वह भगवान् में प्रवेश (तादात्म्य) प्राप्त कर लेता है। यह मोक्ष की सर्वोच्च अवस्था है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।