आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३२ PM | सूर्यास्त: ०५:२८ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 53

अध्याय 18 · श्लोक 53

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम्। विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते॥५३॥

ahaṅkāraṃ balaṃ darpaṃ kāmaṃ krodhaṃ parigraham | vimucya nirmamaḥ śānto brahma-bhūyāya kalpate ||53||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अहंकारम्: ego; बलम्: arrogance; दर्पम्: pride; कामम्: desire; क्रोधम्: anger; परिग्रहम्: possessiveness; विमुच्य: having abandoned; निर्ममः: free from the sense of "mine"; शान्तः: peaceful; ब्रह्म-भूयाय: for becoming Brahman; कल्पते: is fit.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अहंकार, बल (घमण्ड), दर्प, काम, क्रोध और परिग्रह (संग्रह) का त्याग करके, ममता से रहित और शान्त होकर – वह ब्रह्मभूत होने के योग्य हो जाता है।

English Translation

...having abandoned ego, arrogance, pride, desire, anger, and possessiveness, free from the sense of "mine" and peaceful – he is fit for becoming Brahman.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

इन सब दोषों से मुक्त होकर, ममतारहित और शान्तचित्त साधक ब्रह्म को प्राप्त करने का अधिकारी होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।