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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 51

अध्याय 18 · श्लोक 51

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्यात्मानं नियम्य च। शब्दादीन्विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च॥५१॥

buddhyā viśuddhayā yukto dhṛtyātmānaṃ niyamya ca | śabdādīn viṣayāṃs tyaktvā rāga-dveṣau vyudasya ca ||51||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

बुद्ध्या: with intellect; विशुद्धया: pure; युक्तः: endowed; धृत्या: with firmness; आत्मानम्: the self; नियम्य: controlling; च: and; शब्द-आदीन्: sound etc.; विषयान्: sense objects; त्यक्त्वा: having abandoned; राग-द्वेषौ: attraction and aversion; व्युदस्य: having cast off; च: and.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

विशुद्ध बुद्धि से युक्त होकर, धृति (दृढ़ता) द्वारा आत्मा को वश में करके, शब्दादि विषयों का त्याग करके तथा राग-द्वेष को दूर करके...

English Translation

Endowed with a pure intellect, controlling the self with firmness, abandoning sound and other sense objects, and casting off attraction and aversion...

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक उस साधना के चरणों को बताता है जिससे साधक ब्रह्मप्राप्ति के योग्य बनता है: शुद्ध बुद्धि, आत्मसंयम, विषयासक्ति का त्याग, राग-द्वेष का परित्याग।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।