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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 46

अध्याय 18 · श्लोक 46

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः॥४६॥

yataḥ pravṛttir bhūtānāṃ yena sarvam idaṃ tatam | sva-karmaṇā tam abhyarcya siddhiṃ vindati mānavaḥ ||46||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यतः: from whom; प्रवृत्तिः: the emanation; भूतानाम्: of all beings; येन: by whom; सर्वम्: all; इदम्: this; ततम्: is pervaded; स्व-कर्मणा: by one's own duty; तम्: Him; अभ्यर्च्य: worshiping; सिद्धिम्: perfection; विन्दति: attains; मानवः: a man.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिससे सब प्राणियों की उत्पत्ति हुई और जिससे यह सम्पूर्ण जगत् व्याप्त है, उस परमेश्वर की अपने कर्म द्वारा आराधना करके मनुष्य सिद्धि को प्राप्त होता है।

English Translation

From whom all beings emanate and by whom all this is pervaded – worshiping Him through one's own duty, a man attains perfection.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

स्वकर्म के पालन का रहस्य यह है कि उसे ईश्वर की आराधना के रूप में करना चाहिए। समस्त कर्मों का स्वामी और व्यापक ईश्वर ही है। उसकी उपासना ही सच्ची सिद्धि है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।