आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 43

अध्याय 18 · श्लोक 43

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्। दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्॥४३॥

śauryaṃ tejo dhṛtir dākṣyaṃ yuddhe cāpy apalāyanam | dānam īśvara-bhāvaś ca kṣātraṃ karma svabhāvajam ||43||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

शौर्यम्: valor; तेजः: splendor; धृतिः: firmness; दाक्ष्यम्: resourcefulness; युद्धे: in battle; च: and; अपि: also; अपलायनम्: not fleeing; दानम्: charity; ईश्वर-भावः: lordliness; च: and; क्षात्रम्: of a Kshatriya; कर्म: duty; स्वभाव-जम्: born of his own nature.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

शौर्य (वीरता), तेज (प्रभाव), धृति (दृढ़ता), दाक्ष्य (कुशलता), युद्ध में न भागना, दान और ऐश्वर्यभाव – ये क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं।

English Translation

Valor, splendor, firmness, resourcefulness, not fleeing from battle, charity, and lordliness – these are the duties of a Kshatriya, born of his own nature.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

क्षत्रिय के स्वाभाविक गुण: वीरता, तेज, धैर्य, चतुराई, युद्ध से न भागना, दानशीलता, और नेतृत्व क्षमता। ये गुण उसे शासन और रक्षा के योग्य बनाते हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।