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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 42

अध्याय 18 · श्लोक 42

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च। ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्॥४२॥

śamo damas tapaḥ śaucaṃ kṣāntir ārjavam eva ca | jñānaṃ vijñānam āstikyaṃ brahma-karma svabhāvajam ||42||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

शमः: tranquility; दमः: self-control; तपः: austerity; शौचम्: purity; क्षान्तिः: forgiveness; आर्जवम्: simplicity; एव: indeed; च: and; ज्ञानम्: wisdom; विज्ञानम्: knowledge (of scriptures); आस्तिक्यम्: faith; ब्रह्म-कर्म: the duty of a Brahmin; स्वभाव-जम्: born of his own nature.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

शम (मन का निग्रह), दम (इन्द्रियों का निग्रह), तप, शौच, क्षान्ति, आर्जव, ज्ञान, विज्ञान और आस्तिक्य – ये ब्राह्मण के स्वभावज कर्म हैं।

English Translation

Tranquility, self-control, austerity, purity, forgiveness, simplicity, wisdom, knowledge, and faith – these are the duties of a Brahmin, born of his own nature.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

ब्राह्मण के स्वाभाविक गुण और कर्तव्य: मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण, तपस्या, पवित्रता, क्षमा, सरलता, शास्त्रीय ज्ञान, आध्यात्मिक अनुभव, और ईश्वर में श्रद्धा।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।