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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 41

अध्याय 18 · श्लोक 41

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप। कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः॥४१॥

brāhmaṇa-kṣatriya-viśāṃ śūdrāṇāṃ ca parantapa | karmāṇi pravibhaktāni svabhāva-prabhavair guṇaiḥ ||41||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ब्राह्मण-क्षत्रिय-विशाम्: of Brahmins, Kshatriyas, and Vaishyas; शूद्राणाम्: of Shudras; च: and; परन्तप: O scorcher of foes; कर्माणि: duties; प्रविभक्तानि: are divided; स्वभाव-प्रभवैः: born of their own nature; गुणैः: by the gunas.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे परन्तप! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र – इनके कर्म उनके स्वभाव से उत्पन्न गुणों के अनुसार विभाजित हैं।

English Translation

O scorcher of foes, the duties of Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas, and Shudras are divided according to the gunas born of their own nature.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान् अब वर्णाश्रम धर्म के अनुसार विभिन्न वर्णों के स्वाभाविक कर्म बताते हैं। यह विभाजन गुणों और कर्मों पर आधारित है, जन्म पर नहीं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।