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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 39

अध्याय 18 · श्लोक 39

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः। निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम्॥३९॥

yad agre cānubandhe ca sukhaṃ mohanam ātmanaḥ | nidrālasya-pramādotthaṃ tat tāmasam udāhṛtam ||39||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यत्: which; अग्रे: in the beginning; च: and; अनुबन्धे: in the sequel; च: and; सुखम्: happiness; मोहनम्: deluding; आत्मनः: of the self; निद्रा-आलस्य-प्रमाद-उत्थम्: arising from sleep, laziness, and heedlessness; तत्: that; तामसम्: tamasic; उदाहृतम्: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो सुख आरम्भ में और अन्त में आत्मा को मोहित करने वाला है, तथा निद्रा, आलस्य और प्रमाद से उत्पन्न होता है – वह तामस सुख कहा गया है।

English Translation

That happiness which deludes the self, both in the beginning and at the end, and which arises from sleep, laziness, and heedlessness – that is declared to be tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस सुख आलस्य, निद्रा, प्रमाद से उत्पन्न होता है। यह आरम्भ और अन्त दोनों में मोहकारक है, अर्थात् यह वास्तव में सुख नहीं बल्कि अज्ञान का रूप है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।