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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 35

अध्याय 18 · श्लोक 35

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च। न विमुञ्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी॥३५॥

yayā svapnaṃ bhayaṃ śokaṃ viṣādaṃ madam eva ca | na vimuñcati durmedhā dhṛtiḥ sā pārtha tāmasī ||35||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यया: by which; स्वप्नम्: sleep; भयम्: fear; शोकम्: grief; विषादम्: despair; मदम्: arrogance; एव: indeed; च: and; न: not; विमुञ्चति: gives up; दुर्मेधा: one of evil intellect; धृतिः: firmness; सा: that; पार्थ: O Partha; तामसी: tamasic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! जिस धृति के द्वारा दुर्मेधा (मन्दबुद्धि) मनुष्य निद्रा, भय, शोक, विषाद और मद (घमण्ड) को नहीं छोड़ता – वह धृति तामसी है।

English Translation

O Partha, that firmness by which a person of evil intellect does not give up sleep, fear, grief, despair, and arrogance – that firmness is tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस धृति दुर्बुद्धि व्यक्ति की होती है। वह निद्रा, भय, शोक, निराशा, अहंकार आदि दोषों को नहीं त्याग पाता। यह धृति वास्तव में दृढ़ता न होकर जड़ता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।