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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 33

अध्याय 18 · श्लोक 33

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः। योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी॥३३॥

dhṛtyā yayā dhārayate manaḥ-prāṇendriya-kriyāḥ | yogenāvyabhicāriṇyā dhṛtiḥ sā pārtha sāttvikī ||33||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

धृत्या: by firmness; यया: which; धारयते: sustains; मनः-प्राण-इन्द्रिय-क्रियाः: the activities of the mind, life-breaths, and senses; योगेन: by yoga; अव्यभिचारिण्या: unswerving; धृतिः: firmness; सा: that; पार्थ: O Partha; सात्त्विकी: sattvic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! जिस धृति (दृढ़ता) के द्वारा अव्यभिचारिणी योग (अटल एकाग्रता) से मन, प्राण और इन्द्रियों की क्रियाओं को धारण किया जाता है – वह धृति सात्त्विकी है।

English Translation

O Partha, that firmness by which, through unswerving yoga, one sustains the activities of the mind, life-breaths, and senses – that firmness is sattvic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सात्त्विक धृति अटल और योगयुक्त होती है। यह मन, प्राण और इन्द्रियों को सही मार्ग पर स्थिर रखती है, विचलित नहीं होती। ऐसी धृति से साधक अपने लक्ष्य पर अडिग रहता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।