आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 32

अध्याय 18 · श्लोक 32

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता। सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी॥३२॥

adharmaṃ dharmam iti yā manyate tamasāvṛtā | sarvārthān viparītāṃś ca buddhiḥ sā pārtha tāmasī ||32||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अधर्मम्: unrighteousness; धर्मम्: righteousness; इति: thus; या: which; मन्यते: thinks; तमसा: by ignorance; आवृता: covered; सर्व-अर्थान्: all things; विपरीतान्: perversely; च: and; बुद्धिः: intellect; सा: that; पार्थ: O Partha; तामसी: tamasic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! जो बुद्धि तमस् से आच्छन्न होकर अधर्म को धर्म मानती है और सम्पूर्ण पदार्थों को विपरीत (उल्टा) देखती है – वह बुद्धि तामसी है।

English Translation

O Partha, that intellect which, covered by ignorance, thinks unrighteousness to be righteousness and sees all things perversely – that intellect is tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस बुद्धि अज्ञान से ढकी रहती है। वह अधर्म को ही धर्म समझती है, और हर बात को उल्टा देखती है। इसमें विवेक का पूर्ण अभाव होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।