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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 30

अध्याय 18 · श्लोक 30

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये। बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी॥३०॥

pravṛttiṃ ca nivṛttiṃ ca kāryākārye bhayābhaye | bandhaṃ mokṣaṃ ca yā vetti buddhiḥ sā pārtha sāttvikī ||30||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

प्रवृत्तिम्: what is to be done; च: and; निवृत्तिम्: what is not to be done; च: and; कार्य-अकार्ये: proper and improper action; भय-अभये: fear and fearlessness; बन्धम्: bondage; मोक्षम्: liberation; च: and; या: which; वेत्ति: knows; बुद्धिः: intellect; सा: that; पार्थ: O Partha; सात्त्विकी: sattvic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे पार्थ! जो बुद्धि प्रवृत्ति (कर्म करने) और निवृत्ति (कर्म त्यागने) को, कार्य-अकार्य को, भय-अभय को, तथा बन्धन और मोक्ष को यथार्थ रूप से जानती है – वह बुद्धि सात्त्विकी है।

English Translation

O Partha, that intellect which knows the paths of action and renunciation, what is proper and improper, fear and fearlessness, bondage and liberation – that intellect is sattvic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सात्त्विक बुद्धि में विवेक होता है। वह स्पष्ट रूप से जानती है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, किससे डरना चाहिए और किससे नहीं, क्या बाँधता है और क्या मुक्त करता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।