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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 29

अध्याय 18 · श्लोक 29

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु। प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय॥२९॥

buddher bhedaṃ dhṛteś caiva guṇatas tri-vidhaṃ śṛṇu | procyamānam aśeṣeṇa pṛthaktvena dhanañjaya ||29||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

बुद्धे: of intellect; भेदम्: the distinction; धृते: of firmness; च: and; एव: also; गुणतः: according to the gunas; त्रि-विधम्: threefold; शृणु: hear; प्रोच्यमानम्: being described; अशेषेण: fully; पृथक्त्वेन: separately; धनञ्जय: O Dhananjaya.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे धनञ्जय! बुद्धि और धृति के भी गुणों के अनुसार तीन प्रकार के भेद को सम्पूर्ण रूप से पृथक-पृथक सुनो।

English Translation

O Dhananjaya, now hear the threefold division of intellect and firmness according to the gunas, as I declare them fully and separately.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब भगवान् बुद्धि (समझने की शक्ति) और धृति (धारण करने की शक्ति) के तीन-तीन प्रकार बताने जा रहे हैं, जो सात्त्विक, राजस और तामस के रूप में विभाजित हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।