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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 28

अध्याय 18 · श्लोक 28

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः। विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते॥२८॥

ayuktaḥ prākṛtaḥ stabdhaḥ śaṭho naiṣkṛtiko 'lasaḥ | viṣādī dīrgha-sūtrī ca kartā tāmasa ucyate ||28||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अयुक्तः: unsteady; प्राकृतः: vulgar; स्तब्धः: stubborn; शठः: deceitful; नैष्कृतिकः: given to insulting; अलसः: lazy; विषादी: despondent; दीर्घ-सूत्री: procrastinating; च: and; कर्ता: doer; तामसः: tamasic; उच्यते: is called.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो कर्ता अयुक्त (असंयमी), प्राकृत (असभ्य), स्तब्ध (घमण्डी), शठ (ठग), नैष्कृतिक (दूसरों का अपमान करने वाला), आलसी, विषादी (उदास रहने वाला) और दीर्घसूत्री (टालमटोल करने वाला) है – वह तामस कर्ता कहलाता है।

English Translation

The doer who is unsteady, vulgar, stubborn, deceitful, given to insulting, lazy, despondent, and procrastinating – he is called tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस कर्ता के अनेक दोष बताए गए हैं: असंयम, असभ्यता, अहंकार, छल, अपमानप्रियता, आलस्य, निराशा, और कार्य में विलम्ब। ऐसा व्यक्ति न तो अपना कर्तव्य ठीक से निभाता है और न ही उन्नति कर पाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।