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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 27

अध्याय 18 · श्लोक 27

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

रागी कर्मफलप्रेप्सुर्लुब्धो हिंसात्मकोऽशुचिः। हर्षशोकान्वितः कर्ता राजसः परिकीर्तितः॥२७॥

rāgī karma-phala-prepsur lubdho hiṃsātmako 'śuciḥ | harṣa-śokānvitaḥ kartā rājasaḥ parikīrtitaḥ ||27||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

रागी: attached; कर्म-फल-प्रेप्सुः: desirous of the fruits of actions; लुब्धः: greedy; हिंसात्मकः: given to injuring; अशुचिः: impure; हर्ष-शोक-अन्वितः: subject to joy and sorrow; कर्ता: doer; राजसः: rajasic; परिकीर्तितः: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो कर्ता रागी है, कर्मफल की इच्छा रखता है, लोभी है, हिंसक प्रवृत्ति का है, अशुचि है, तथा हर्ष-शोक से युक्त है – वह राजस कर्ता कहा गया है।

English Translation

The doer who is attached, desirous of the fruits of actions, greedy, given to injuring, impure, and subject to joy and sorrow – he is declared to be rajasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

राजस कर्ता के लक्षण: आसक्त, फलेच्छुक, लोभी, हिंसक, अशुद्ध, तथा सुख-दुःख से व्याकुल। ऐसा कर्ता अपने कर्मों के फल से बँध जाता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।