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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 26

अध्याय 18 · श्लोक 26

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः। सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते॥२६॥

mukta-saṅgo 'nahaṃ-vādī dhṛty-utsāha-samanvitaḥ | siddhy-asiddhyor nirvikāraḥ kartā sāttvika ucyate ||26||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

मुक्त-सङ्गः: freed from attachment; अनहं-वादी: without egoism; धृति-उत्साह-समन्वितः: endowed with firmness and enthusiasm; सिद्धि-असिद्ध्योः: in success and failure; निर्विकारः: unchanged; कर्ता: doer; सात्त्विकः: sattvic; उच्यते: is called.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो कर्ता आसक्ति रहित, अहंकार रहित, धैर्य और उत्साह से युक्त तथा सफलता-असफलता में निर्विकार है – वह सात्त्विक कर्ता कहलाता है।

English Translation

The doer who is free from attachment, non-egoistic, endowed with firmness and enthusiasm, and unaffected by success or failure – he is called sattvic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सात्त्विक कर्ता के लक्षण: आसक्ति-मुक्त, अहंकार-शून्य, धैर्य और उत्साह से परिपूर्ण, तथा सफलता-असफलता में समान भाव रखने वाला। ऐसा कर्ता कर्मयोगी है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।