आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 25

अध्याय 18 · श्लोक 25

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्। मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते॥२५॥

anubandhaṃ kṣayaṃ hiṃsām anapekṣya ca pauruṣam | mohād ārabhyate karma yat tat tāmasam ucyate ||25||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अनुबन्धम्: consequence; क्षयम्: loss; हिंसाम्: injury; अनपेक्ष्य: without considering; च: and; पौरुषम्: one's own ability; मोहात्: out of delusion; आरभ्यते: is begun; कर्म: action; यत्: which; तत्: that; तामसम्: tamasic; उच्यते: is called.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्य को बिना विचारे केवल मोह से आरम्भ किया जाता है – वह तामस कहलाता है।

English Translation

That action which is undertaken out of delusion, without considering the consequences, loss, injury, and one's own ability – that is called tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस कर्म में विवेक का सर्वथा अभाव होता है। न तो परिणाम का ध्यान, न हानि का विचार, न हिंसा का भय, न अपनी क्षमता का आकलन। ऐसा कर्म अज्ञान से प्रेरित होता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।