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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 20

अध्याय 18 · श्लोक 20

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते। अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्॥२०॥

sarva-bhūteṣu yenaikaṃ bhāvam avyayam īkṣate | avibhaktaṃ vibhakteṣu taj jñānaṃ viddhi sāttvikam ||20||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सर्व-भूतेषु: in all beings; येन: by which; एकम्: one; भावम्: nature; अव्ययम्: imperishable; ईक्षते: sees; अविभक्तम्: undivided; विभक्तेषु: in the divided; तत्: that; ज्ञानम्: knowledge; विद्धि: know; सात्त्विकम्: sattvic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जिस ज्ञान से सम्पूर्ण भूतों में एक अविनाशी भाव (ब्रह्म) अलग-अलग शरीरों में भी अविभक्त रूप से देखा जाता है, उस ज्ञान को सात्त्विक जानो।

English Translation

That knowledge by which one sees one imperishable being in all beings, undivided in the divided – know that knowledge to be sattvic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सात्त्विक ज्ञान वह है जो समस्त प्राणियों में एक ही अविनाशी तत्व को देखता है। वह भेदों में भी अभेद दर्शन करता है। यह आत्मज्ञान या ब्रह्मज्ञान है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।